हिमाद्रि आइस रिंक का जीर्णोद्धार: 8.5 करोड़ की लागत से हुआ शहंशाही नवीनीकरण

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May 6, 2026 - 00:38
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हिमाद्रि आइस रिंक का जीर्णोद्धार: 8.5 करोड़ की लागत से हुआ शहंशाही नवीनीकरण
हिमाद्रि आइस रिंक का जीर्णोद्धार: 8.5 करोड़ की लागत से हुआ शहंशाही नवीनीकरण

हिमाद्रि आइस रिंक का जीर्णोद्धार: 8.5 करोड़ की लागत से हुआ शहंशाही नवीनीकरण

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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमाद्रि आइस रिंक के जीर्णोद्धार की प्रथम वर्षगांठ पर की घोषणा। लगभग 8.5 करोड़ रुपये की लागत से यह रिंक अब खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के लिए फिर से खोला गया है।

देहरादून, अविकल उत्तराखंड। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम में हिमाद्रि आइस रिंक के जीर्णोद्धार की प्रथम वर्षगांठ मनाई। इस अवसर पर उन्होंने सभी उपस्थित अतिथियों और खिलाड़ियों को बधाई दी और आइस रिंक की नई उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने उत्तराखंड हॉकी आइस टीम की जर्सी और 'पे और प्ले' पोर्टल का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि हिमाद्रि आइस रिंक न केवल उत्तराखंड के लिए, बल्कि भारत के लिए गर्व का विषय है। इसकी स्थापना वर्ष 2011 में हुई थी और यह भारत की एकमात्र अंतरराष्ट्रीय आइस रिंक है, जिसमें पहले साउथ एशियन विंटर गेम्स का आयोजन किया गया था। हालांकि, बाद में रखरखाव के अभाव में इसका संचालन बंद हो गया था।

आइस रिंक के जीर्णोद्धार के बाद, राज्य सरकार ने इसे पुनः संतुलित करके खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने का संकल्प लिया। इस परियोजना की लागत लगभग 8.5 करोड़ रुपये है, जिसमें एक मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट भी शामिल है, जो हरित ऊर्जा के उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

हिमाद्रि आइस रिंक

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पिछले वर्ष के दौरान, इस आइस रिंक ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, जैसे नेशनल आइस स्केटिंग चैंपियनशिप, एशियन ट्रॉफी, और राष्ट्रीय आइस हॉकी लीग, का सफलतापूर्वक आयोजन किया। विभिन्न राज्य के खिलाड़ी यहां आइस स्केटिंग और आइस हॉकी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

भारत की आइस हॉकी टीम का प्रशिक्षण भी इसी रिंक में कराया गया है। मुख्यमंत्री ने पिछले वर्ष अगस्त में "एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी" की मेज़बानी की उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया, जिसमें एशिया के 11 देशों के 200 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया।

धरती पर खेलों की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाए जा रहे “खेलो इंडिया” और “फिट इंडिया मूवमेंट” का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ये कार्यक्रम हमारे खिलाड़ियों के लिए कई अवसरों का सृजन कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के बाद उत्तराखंड को "देवभूमि" के साथ-साथ "खेलभूमि" के रूप में एक नई पहचान मिली है। राज्य के खिलाड़ियों ने इस बार 103 पदक जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया।

गौरतलब है कि राज्य सरकार विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना विकसित करने के लिए योजनाबद्ध रूप से कार्य कर रही है। यह योजना 23 खेल अकादमियों की स्थापना पर आधारित है, ताकि और अधिक खिलाड़ियों को समर्पित प्रशिक्षण दिया जा सके।

हमें उम्मीद है कि खिलाड़ियों को दी जाने वाली सुविधाएं, जैसे कि निःशुल्क प्रशिक्षण और खेल छात्रवृत्ति, उन्हें आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगी। सरकार की नई खेल नीति के तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल विजेताओं को सरकारी नौकरी की सुविधा दी जा रही है।

इस कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री श्रीमती रेखा आर्य, विधायक उमेश शर्मा काऊ, विशेष सचिव अमित सिन्हा, खेल विभाग के अधिकारी, और बड़ी संख्या में खिलाड़ी एवं खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

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Team The Odd Naari - नीतू शर्मा

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