उत्तराखण्ड: आध्यात्मिक राजधानी के सफर में महत्वपूर्ण कदम
The post उत्तराखण्ड : आध्यात्मिक राजधानी की दिशा में बढ़े कदम appeared first on Avikal Uttarakhand. चारधाम के साथ ही अन्य मंदिरों में भी भक्तों की संख्या बढ़ी जागेश्वर व त्रियुगीनारायण में दर्शनार्थियों की संख्या ढाई गुना धारी देवी में दोगुना और पूर्णागिरि धाम में डेढ़… The post उत्तराखण्ड : आध्यात्मिक राजधानी की दिशा में बढ़े कदम appeared first on Avikal Uttarakhand.
उत्तराखण्ड: आध्यात्मिक राजधानी के सफर में महत्वपूर्ण कदम
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखण्ड अपने चारों धामों और अन्य प्रसिद्ध मंदिरों में दर्शनार्थियों की बढ़ती संख्या के साथ आध्यात्मिक राजधानी बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में धार्मिक स्थलों के विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। यहाँ पर हम इन प्रयासों और असरदार आंकड़ों पर गौर करेंगे।
उत्तराखण्ड, जिसे देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है, आध्यात्मिकता के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। इस प्रदेश ने हाल ही में अपनी पहचान को और मजबूत करते हुए आध्यात्मिक राजधानी बनने की दिशा में बढ़ते कदम उठाए हैं। चारधाम यात्रा के साथ ही सभी प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है।
बढ़ती संख्या दर्शाएगी उत्साह
इस वर्ष की पहली छमाही में परंपरागत धार्मिक स्थलों जैसे जागेश्वर धाम (अल्मोड़ा) और त्रियुगीनारायण (रुद्रप्रयाग) में दर्शनार्थियों की संख्या में ढाई गुना वृद्धि हुई है। इसके अलावा, धारी देवी (श्रीनगर) में श्रद्धालुओं की संख्या दोगुनी हो गई है, जबकि पूर्णागिरी धाम (चंपावत) में श्रद्धालुओं की संख्या डेढ़ गुना बढ़ी है।
मुख्यमंत्री का संकल्प
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड को आध्यात्मिक राजधानी बनाने का महत्त्वाकांक्षी संकल्प लिया है। इसके तहत वह प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों को आपस में जोड़ने, केदारखंड के तर्ज पर धार्मिक स्थलों का विकास और बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहे हैं।
चारधाम यात्रा की ऐतिहासिक सफलता
धामी सरकार की दूरदर्शिता का परिणाम है कि चारधाम यात्रा इस वर्ष नए रिकॉर्ड बना रही है। 105 दिनों के इस यात्रा काल में 45 लाख 84 हजार 375 श्रद्धालु चारधाम के दर्शनों के लिए पहुँच चुके हैं, जो कि पिछले वर्षों की तुलना में कई गुना अधिक है।
भक्तों की संख्या का विस्तृत आंकड़ा
विभिन्न मंदिरों में भक्तों की संख्या में हुई वृद्धि के आंकड़े भी बहुत प्रेरणादायक हैं। इस वर्ष जागेश्वर में 01 लाख 74 हजार 119 श्रद्धालु पहुंचे हैं, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या मात्र 67 हजार 875 थी। इसी तरह पूर्णागिरि धाम में इस वर्ष 20,91,788 श्रद्धालु रहे हैं, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 14,35,290 था।
नए कीर्तिमान और दिलचस्प तथ्य
यमुनोत्री धाम में भी इस वर्ष की यात्रा ने नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। 6 लाख 54 हजार से अधिक बुद्धिजीवियों ने माँ यमुना के दर्शनों का लाभ उठाया है। इसी प्रकार, बद्रीनाथ यात्रा ने भी 100 दिनों में 15 लाख 52 हजार 021 भक्तों को आकर्षित किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 11 हजार 613 अधिक है।
कैंची धाम में भी बढ़ी आस्था
नैनीताल स्थित कैंची धाम में श्रद्धालुओं की संख्या का यह आलम है कि इस वर्ष जनवरी से जून तक 24 लाख 34 हजार 507 भक्त यहाँ बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शनों के लिए पहुंच चुके हैं। यह आंकड़े धार्मिक पर्यटन में उत्तराखण्ड के आस्था के इस सैलाब को दर्शाते हैं।
आगे की राह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुसार उत्तराखण्ड को आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए तमाम प्रयास जारी हैं। राज्य सरकार ने तीर्थ स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं का विकास शुरू कर दिया है, जिसके फलस्वरूप श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।
निष्कर्ष
इस प्रकार, उत्तराखण्ड का आध्यात्मिक राजधानी बनने का सफर ही नहीं, बल्कि यहाँ के धार्मिक स्थलों की समृद्धि और भक्तों की संख्या में उभार भी अद्भुत है। यह दर्शाता है कि जब संकल्प हो, तो किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है।
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सादर,
स्नेहा वर्मा,
Team The Odd Naari
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